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On 14 January घायल पक्षी दिखें तो तुरंत करें हेल्पलाइन पर कॉल

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जयपुर: मकर संक्रांति पर्व पर जयपुर का पूरा आसमान सतरंगा हो जाता है। लोग छतों पर चढ़कर पतंगें उड़ाते हैं। लेकिन पतंगबाजी में कांच की डोर या मांझा से सैकड़ों पक्षियों की जान को भी खतरा रहता है। पक्षी मांझा से कट जाते हैं और उनकी जानें भी जाती हैं। एक शख्स ऐसा भी है जो मकर संक्रांति पर पंछियों की जान बचाने में जुटा रहता है।

सड़कों पर घूमते हुए पक्षियों को बचाने के लिए संघर्ष
दीपक संक्रांति पर परिवार के साथ खुशियां नहीं मानते, बल्कि सड़कों पर निकलकर सैकड़ों पक्षियों की जान बचाते हैं। उन्हें मेडिकल ऐड पहुंचाते हैं। 45 साल के दीपक शर्मा 9 साल से यह काम कर रहे हैं। मंझे में लगा कांच का पाउडर पतंग की डोर को तीखा बना देता है और जानलेवा भी साबित होता है।

सूचना मिलते ही प्राथमिक उपचार
दीपक ‘ऑपरेशन बर्ड स्काई’ के नाम से एक अभियान चलाते हैं। मंझे से कटे पंछियों के बारे में सूचना मिलते ही वे पक्षी का प्राथमिक उपचार करते हैं और फिर उसे किसी ऐसे पक्षी चिकित्सालय में पहुंचाते हैं जहां वह तब तक रह सके जब तक दुबारा न उड़ पाए। दीपक का कहना है कि ” हम पिजन या जो भी घायल चिड़िया हैं उस पर से पहले तो लिपटा हुआ धागा हटाते हैं, फिर मेलोनिक्स पेन किलर व एंटी बायोटिक उसकी चोंच में डालते हैं। उसकी मरहम-पट्टी भी करते हैं।”

सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान पतंगबाजी पर पाबंदी
दीपक लोगों से गुहार भी करते आए हैं कि सावधानी से पतंग उड़ाएं। वह कहते हैं कि ” हम पतंग उड़ाते हैं लेकिन बेज़ुबान को फांसी देते हैं। कम से कम सुबह-शाम पतंग न उड़ाएं जब इनके घर आने-जाने का वक्त हो। ” हालांकि इस बार उनके लिए अच्छी खबर है। इस बार जयपुर जिला प्रशासन ने सूर्यास्त और सूर्योदय के दौरान पतंग उड़ाने पर पाबंदी लगा दी है ताकि पक्षी सुरक्षित रहें।

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